जिला प्रमुख क्या होता है इनका क्या काम होता है कैसे जिला प्रमुख बनता है

 जिला प्रमुख

 जिला प्रमुख त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) में जिला स्तर पर जिला परिषद का सर्वोच्च राजनीतिक जिला प्रमुख होता है।जिला परिषद सदस्यों का प्रत्यक्ष चुनाव:

  • सबसे पहले जिले की जनता अपने-अपने वॉर्ड (क्षेत्र) से वॉर्ड सदस्यों यानी जिला परिषद सदस्यों  का सीधा (प्रत्यक्ष) चुनाव करती है। 

आरक्षण और लॉटरी प्रक्रिया:

  • चुनाव से पहले राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशानुसार जिला प्रमुख पद के लिए आरक्षण (एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए सीटें) लॉटरी प्रक्रिया द्वारा तय किया जाता है। 

जिला प्रमुख का अप्रत्यक्ष चुनाव:

  • जनता द्वारा चुने गए ये सभी जिला परिषद सदस्य (पार्षद) मिलकर अपने ही बीच में से किसी एक सदस्य को जिला प्रमुख के रूप में चुनते हैं।
  • जिला प्रमुख का चुनाव नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्यों द्वारा अपने बीच में से ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष मतदान के जरिए किया जाता है। आम जनता सीधे जिला प्रमुख को नहीं चुनती है, बल्कि जनता जिला परिषद के वार्डों/क्षेत्रों के सदस्यों (डीडीसी/जिला परिषद सदस्य) को चुनती है, और ये चुने हुए सदस्य ही मिलकर जिला प्रमुख का चुनाव करते हैं। मुख्य बिंदु:
  • मतदाता: जनता द्वारा चुने गए जिला परिषद के सभी निर्वाचित सदस्य। 
  • चयन प्रक्रिया: ये सदस्य अपने में से ही बहुमत के आधार पर किसी एक सदस्य को जिला प्रमुख के रूप में चुनते हैं। 
  • संचालन: यह चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग  द्वारा नियुक्त रिटर्निंग अधिकारी की देखरेख में संपन्न होता है। 
  • राजस्थान में जिला परिषद का राजनीतिक प्रमुख जिला प्रमुख होता है। मुख्य बातें
  • राजनीतिक प्रमुख (जिला प्रमुख): जिला प्रमुख का चुनाव जिला परिषद के चुने हुए सदस्यों द्वारा आपस में किया जाता है। यह पंचायती राज व्यवस्था का जिला स्तर पर सर्वोच्च पद होता है। 

प्रशासनिक प्रमुख (मुख्य कार्यकारी अधिकारी / CEO): जिला परिषद के प्रशासनिक कार्यों और विकास योजनाओं को संभालने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया जाता है, जो सामान्यतः आईएएस (IAS) या आरएएस (RAS) स्तर का अधिकारी होता है।

  • वर्तमान में राजस्थान में कुल 41जिला परिषदें हैं। मुख्य बिंदु
  • नया ढांचा: पुनर्गठन के बाद प्रदेश में जिला परिषदों की संख्या 33 से बढ़कर 41 हो गई है। 
  • नई जिला परिषदें: नए बने 8 जिलों (डीग, बालोतरा, ब्यावर, डीडवाना-कुचामन, फलौदी, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़ और सलुंबर) में नए सिरे से जिला परिषदों का ढांचा लागू किया गया है। 

जिला प्रमुख: जिला परिषदों की संख्या 41 होने से प्रदेश में जिला प्रमुख के कुल पद भी 41 हो गए हैं। 

जिला प्रमुख के मुख्य कार्य और उत्तरदायित्व 

1. बैठकों की अध्यक्षता करना

  • जिला प्रमुख जिला परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है और उनका संचालन करता है।
  • वह हर तीन महीने में जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक बुलाता है और उसकी अध्यक्षता करता है। 

2. विकास योजनाओं का समन्वय और संचालन

  • वह पूरे जिले के लिए आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएं तैयार करने में मुख्य भूमिका निभाता है। 
  • जिले की सभी पंचायत समितियों के कार्यों में तालमेल (समन्वय) बिठाता है और उनकी देखरेख करता है। 

3. प्रशासनिक नियंत्रण और निगरानी

  • जिले में संचालित विकास योजनाओं के संचालन, उनकी गुणवत्ता और कार्यों के भुगतान (पेमेंट) पर निगरानी रखता है। 
  • जिला परिषद के प्रशासनिक कार्यों पर नजर रखता है, हालांकि प्रशासनिक प्रमुख मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO – जो कि आईएएस अधिकारी होता है) होता है। 

4. वित्तीय नियंत्रण एवं बजट

  • जिला परिषद के बजट, वित्त और धन के उचित उपयोग पर नियंत्रण रखता है।
  • विभिन्न स्थाई समितियों (जैसे वित्त, उत्पादन, शिक्षा आदि) के कार्यों के बीच समन्वय स्थापित करता है। 

5. आपदा और अन्य जनहित कार्य

  • जिले में प्राकृतिक आपदा या संकट के समय राहत कार्यों की समीक्षा और निर्देशन करना।
  • जिला प्रमुख के मुख्य कार्य और अधिकार
  • बैठकों की अध्यक्षता: जिला प्रमुख जिला परिषद की सभी बैठकों का आयोजन और अध्यक्षता करता है। 
  • ग्रामीण विकास: वह जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों, योजनाओं और कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर उन्हें लागू करवाने में मुख्य भूमिका निभाता है। 
  • वित्तीय अधिकार: उसके पास विकास कार्यों से जुड़े निश्चित राशि के बिलों और चेकों पर हस्ताक्षर करने के अधिकार होते हैं। 
  • निरीक्षण व समन्वय: वह जिले की विभिन्न पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों की समीक्षा और समन्वय का काम करता है।

जिला प्रमुख पावर

जिला प्रमुख पंचायती राज व्यवस्था (त्रि-स्तरीय शासन) के तहत जिला परिषद का सर्वोच्च राजनीतिक और प्रशासनिक मुखिया होता है। राजस्थान पंचायती राज अधिनियम के तहत जिला प्रमुख को जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, बजट और प्रशासनिक नियंत्रण के लिए व्यापक शक्तियां (पावर) और अधिकार प्राप्त हैं। 

जिला शक्तियाप्रमुख की मुख्य 

1. प्रशासनिक और बैठक संबंधी शक्तियां

  • बैठकों की अध्यक्षता: जिला प्रमुख जिला परिषद की सभी सामान्य और विशेष बैठकों का आयोजन करता है और उनकी अध्यक्षता करता है। 
  • प्रशासनिक नियंत्रण: जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO – जो आमतौर पर IAS या वरिष्ठ RAS अधिकारी होता है) और अन्य कर्मचारियों के कामकाज की निगरानी करता है। 
  • रिकॉर्ड का निरीक्षण: जिला परिषद के सभी दस्तावेजों, फाइलों और खातों के निरीक्षण का पूर्ण अधिकार होता है।

2. वित्तीय शक्तियां 

  • बजट पर नियंत्रण: जिला परिषद का सालाना बजट (जो करोड़ों रुपये का होता है) जिला प्रमुख की देखरेख में तैयार और पारित होता है। 
  • फंड आवंटन: जिले के विकास कार्यों और पिछड़े क्षेत्रों के उत्थान के लिए फंड जारी करने का मुख्य अधिकार जिला प्रमुख के पास होता है। 
  • वित्तीय मंजूरी: 20,000 रुपये से अधिक के सभी चेक और वित्तीय भुगतानों पर जिला प्रमुख की निगरानी व नियंत्रण होता है। 
  • आपातकालीन वित्तीय शक्ति: प्राकृतिक आपदा, महामारी या जन-धन की हानि होने पर अपने विवेक से 1 लाख रुपये तक की तत्काल सहायता राशि जारी करने का अधिकार होता है।

3. विकास और योजना संबंधी कार्य

  • योजनाओं का क्रियान्वयन: केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही ग्रामीण विकास योजनाओं (जैसे- मनरेगा, ग्रामीण आवास, जलापूर्ति) की निगरानी और समीक्षा करता है। 
  • निगरानी और भुगतान: ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता की जांच करना और उनके भुगतान पर नियंत्रण रखना। 
  • समन्वय : जिले की सभी पंचायत समितियों (प्रधानों) और ग्राम पंचायतों (सरपंचों) के कार्यों के बीच समन्वय स्थापित करना।

4. न्यायिक व अर्ध-न्यायिक अधिकार

  • विवादों का निपटारा: जिला प्रमुख को ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले कुछ स्थानीय व आपसी विवादों को सुनने और उनका फैसला सुनाने का भी पारंपरिक व वैधानिक अधिकार प्राप्त होता है। 

1. वित्तीय अधिकार 

  • चेक पर हस्ताक्षर: जिले में ग्रामीण विकास से जुड़े 20,000 रुपये से अधिक के सभी चेकों पर जिला प्रमुख के हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं, जिसकी कोई अधिकतम सीमा नहीं है।
  • स्व-विवेक कोटा: प्राकृतिक आपदा या किसी जन-धन की हानि होने पर जिला प्रमुख को अपने विवेक से तुरंत 1 लाख रुपये तक की राहत राशि जारी करने का विशेष अधिकार होता है। 

2. प्रशासनिक एवं नीतिगत अधिकार 

  • स्थापना समिति के अध्यक्ष: जिला प्रमुख ‘जिला स्थापना समिति’  का अध्यक्ष होता है। इसके तहत जिले में पंचायती राज कर्मचारियों (जैसे तृतीय श्रेणी शिक्षक, ग्राम विकास अधिकारी आदि) की नियुक्तियों, तबादलों और अनुशासनात्मक कार्रवाइयों में इसकी मुख्य भूमिका होती है। 
  • प्रशासन पर नियंत्रण: जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी यानी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO – IAS/RAS) को जिला प्रमुख के दिशा-निर्देशों और मार्गदर्शन में काम करना होता है। 
  • बैठकों की अध्यक्षता: जिला परिषद की सभी सामान्य और विशेष बैठकों की अध्यक्षता जिला प्रमुख ही करता है और विकास योजनाओं को मंजूरी देता है। 

3. विकास और अनुश्रवण 

  • विकास योजनाओं का क्रियान्वयन: केंद्र और राज्य सरकार की सभी ग्रामीण विकास योजनाओं (जैसे मनरेगा, पीएम आवास योजना, ग्रामीण सड़कें) के बजट का आवंटन और उसकी निगरानी जिला प्रमुख के हाथों में होती है। 
  • पंचायत समितियों पर नियंत्रण: जिले के अंतर्गत आने वाली सभी पंचायत समितियों और प्रधानों के कामकाज की निगरानी और समीक्षा करने का अधिकार जिला प्रमुख को होता है। 

4. वेतन, भत्ते और सरकारी सुविधाएं 

  • मासिक मानदेय : राज्य सरकार द्वारा की गई बढ़ोतरी के बाद जिला प्रमुख को लगभग 18,368 रुपये प्रति माह का मानदेय मिलता है। 
  • सरकारी वाहन व आवास: जिला प्रमुख को आधिकारिक कार्यों के लिए सरकारी गाड़ी (ईंधन के साथ) और जिला मुख्यालय पर एक सुसज्जित कार्यालय व सरकारी आवास की सुविधा मिलती है।
  • भत्ते: बैठकों में शामिल होने के लिए दैनिक भत्ता (TA/DA) और अन्य आधिकारिक चिकित्सा सुविधाएं भी मिलती हैं। 

5. सामाजिक व राजनीतिक प्रतिष्ठा 

  • प्रोटोकॉल में ऊंचा स्थान: जिला प्रमुख को जिले का ‘प्रथम नागरिक’ माना जाता है। जिले में होने वाले किसी भी बड़े सरकारी या प्रशासनिक कार्यक्रम में जिला प्रमुख को कलेक्टर से भी ऊपर या समकक्ष का वीआईपी (VIP) प्रोटोकॉल दर्जा प्राप्त होता है।

जिला प्रमुख के बारे में जानकारी बताइए

जिला प्रमुख कौन होता है और कैसे चुना जाता है?

  • चयन प्रक्रिया: जिला प्रमुख का चुनाव जिले की जनता द्वारा चुने गए जिला परिषद सदस्यों में से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से होता है। 
  • कार्यकाल: सामान्य परिस्थितियों में जिला प्रमुख का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। 
  • प्रशासनिक अधिकारी: राजनीतिक प्रमुख जिला प्रमुख होता है, जबकि प्रशासनिक इकाई का प्रमुख मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) होता है जो एक आईएएस (IAS) अधिकारी होता है। 

मुख्य कार्य और शक्तियां

  • बैठकें: वह जिला परिषद की सभी बैठकों का आयोजन और अध्यक्षता करता है। 
  • विकास कार्य: ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, योजनाओं के क्रियान्वयन और देखरेख में इसकी व्यापक भूमिका होती है। 
  • निगरानी: जिले की पंचायत समितियों और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों पर नजर रखता है।
  • जिला प्रमुख किसी जिले की जिला परिषद का राजनीतिक प्रमुख या अध्यक्ष होता है। 

चयन प्रक्रिया

  • जनता सीधे जिला प्रमुख को वोट नहीं देती है।
  • जनता पहले अपने वार्ड से जिला परिषद के सदस्य चुनती है।
  • ये जीते हुए सदस्य आपस में वोट डालकर अपने में से ही किसी एक को जिला प्रमुख चुनते हैं। 

योग्यता और कार्यकाल

  • उम्मीदवार का जिला परिषद सदस्य होना जरूरी है।
  • उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए।
  • इस पद का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।

मुख्य कार्य और शक्तियां

  • जिला परिषद की सभी बैठकों को बुलाना और उनकी अध्यक्षता करना।
  • जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और निर्माण कार्यों की योजना बनाना व देखरेख करना।
  • पंचायत समितियों के कार्यों पर नजर रखना और तालमेल बिठाना। 
  • जिला परिषद पंचायती राज व्यवस्था का सर्वोच्च ओर तीसरा स्तर है 

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